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Friday, February 20, 2026

जोहरा बाई अम्बाले वाली (मृत्यु)

ज़ोहराबाई अम्बालेवाली🎂1918⚰️21 फरवरी, 1990

ज़ोहराबाई
🎂1918
अम्बाला, पंजाब, ब्रिटिश इंडिया (वर्तमान: अम्बाला, हरियाणा, भारत)

⚰️21 फरवरी, 1990
राष्ट्रीयता
भारतीय
पेशा गायिका
कार्यकाल
1932–1953
प्रसिद्धि का कारण
रतन (1944)
ज़ीनत (1945)
अनमोल घड़ी (1946)
जीवनसाथी
फक़ीर मुहम्मद

प्रसिद्ध पार्श्वगायिका शास्त्रीय गायिका जोहराबाई अम्बालेवाली की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि

ज़ोहराबाई अम्बालेवाली (1918- 21 फरवरी 1990) 1930 और 1940 के दशक में हिन्दी सिनेमा में एक भारतीय शास्त्रीय गायिका और पार्श्व गायिका थीं।

वह 1944 में रतन के हिट संगीत से, "अँखियां मिलाके जिया भरमाके" और "ऐ दीवाली, ऐ दिवाली" के गीतों में अपनी भारी आवाज़ वाले गायन के लिए जानी जाती हैं। अनमोल घड़ी (1946) में शमशाद बेगम के साथ जुगलबंदी गीत "उड़न खटोले पे उड़ जाऊँ" भी उनका मशहूर गीत है। दोनों फिल्मों में संगीत नौशाद ने दिया था।राजकुमारी, शमशाद बेगम और अमीरबाई कर्नाटकी के साथ, वह हिन्दी फिल्म उद्योग में पार्श्व गायकों की पहली पीढ़ी में शामिल थीं। हालाँकि, 1940 के दशक के अंत में, गीता दत्त और लता मंगेशकर जैसी नई आवाज़ों के आने का मतलब ये हुआ कि ज़ोहराबाई अम्बालेवाली का करियर खत्म हो गया।

ज़ोहराबाई वर्तमान हरियाणा के अम्बाला में पेशेवर गायकों के परिवार में जन्मी और पली-बढ़ी जिससे उन्हें उनका उपनाम, 'अम्बालेवाली' मिला। उन्होंने गुलाम हुसैन खान और उस्ताद नासिर हुसैन खान से अपना संगीत प्रशिक्षण शुरू किया। इसके बाद, उन्हें हिन्दुस्तानी संगीत के आगरा घराने से संगीत का प्रशिक्षण दिया गया।

वह युग था जब हिन्दी सिनेमा में ठुमरी-शैली और भारी आवाज़ों के प्रमुख पार्श्व गायिकों के साथ शमशाद बेगम, खुर्शीद, अमीरबाई कर्नाटकी जैसी गायिका गा रही थी। यह 1948 में लता मंगेशकर के आगमन से ठीक पहले था, जिन्होंने गीता दत्त और आशा भोंसले के साथ लोकप्रिय आवाज़ों को बारीक आवाज़ की ओर स्थानांतरित कर दिया। इससे उन पुराने गायिकों का करियर धीरे-धीरे समाप्त हो गया। उस युग की एक और प्रमुख फिल्म पार्श्व गायिका नूरजहां ने पाकिस्तान में प्रवास करने का निर्णय लिया और 2000 में मृत्यु होने तक उन्होंने पाकिस्तान में एक अत्यधिक सफल गायन करियर बनाया। ज़ोहराबाई अम्बालेवाली ने 1950 में फिल्म उद्योग से संन्यास ले लिया, हालांकि उन्होंने अपनी बेटी रोशन कुमारी, जो कि एक प्रसिद्ध कथक नर्तक हैं, के प्रदर्शनों में गाना जारी रखा। रोशन ने सत्यजीत रे की फिल्म जलसाघर (1958) में भी अभिनय किया।

🎥फ़िल्में जिनमें ज़ोहराबाई ने गाने गाए -

 1933 डाकू की लड़की 

 1938 ग्रामोफोन गायक 

 1941 हिम्मत

 1942 तूफ़ान मेल की वापसी

 1943 शकुंतला, राहगीर, तलाश, 

           विजय लक्ष्मी

 1944 गीत, पहले आप, आइना, कारवां और 

           रतन, जीवन, मन की जीत, 

           माँ बाप, ललकार, कविता, पंछी,

           शहंशाह बाबर,

 1945 ज़ीनत, लैला मजनू, हमारा संसार,

           परिंदे, रागनी, घर, सन्यासी,

           छलिया, नसीब, पिया मिलन,

           चालीस करोडो,

 1946 सोहनी महिवाल, हम एक हैं, 

           अनमोल घड़ी, डोना चांदी, ग्वालन,

           जीवन यात्रा, शमा, हमजोली, साथी

           महाराणा प्रताप, नरगिस,  देवर,

           राजपूतानी, सस्सी पुन्नू, कीमत,

           श्रवण कुमार, पंडितजी, रूपा

 1947 एलान, मिर्ज़ा साहिबान, नील कमल,

           रोमियो और जूलियट, अंधों की दुनिया,

           गौरव, गोवा, साजन, बेला, नाटक,

           नतीजा, नैया, दूसरी शादी, हीरा

           रेणुका, डाक बंगला, डोली, हातिमताई,

           दुनिया एक सराय, शिकारपुरी, एक कदम

           मटका शायर रामजोशी, कौन हमारा

           वो ज़माना, बीते दिन, मिट्टी, 

 1948 मेला, घर की इज्जत, दुखियारी, 

           चुनरिया, चंद्रलेखा, लाल दुपट्टा

           हिप हिप हुर्रे, सोना, पराई आग,

           रंगीन ज़माना, रईस, सती विजया,

           दुनियादारी,

 1949 महल, गरीबी, परदा, दिल की बस्ती,

           निशान, नाच,  निस्बत, दौलत, किनारा

           चिलमन, सावन भादों, चार दिन

           अंतिम संदेश 

 1950 प्रीत का गीत, हर हर महादेव,

           सरताज, सौदामिनी, मन का मीत,

           मांग, 

 1951 जादू, ग़ज़ब, एक था राजा, दीपक  

           और कश्मीर 

 1952 उषा किरण, अंबर, काफिला, घुंघरू

           जल परी, संदेश

 1953 तीन बत्ती चार रास्ता, धुन

 1957 नौशेरवान-ए-आदिल


 🎧 ज़ोहराबाई अम्बालेवाली के लोकप्रिय गाने

 

● अंखियां मिलाके जिया भरमा के - रतन 

 ● उड़न खातिर पे उड़ जाऊँ - अनमोल घड़ी

 ● नसिनों मैं नैना मत डालो - जीवन 

 ● साक़ी दिल बुझ गये हैं - गीत

 ● कौन जीवन मैं मेरे  - हमारा संसार

 ● फरियाद न कर, आँसू न बहा - घर

 ● क्या बताएं कितनी हसरत दिल के - नाटक

 ● नहीं चिराग-ए-महोब्बत - सोहनी महिवाल

 ● उन्हें भी राज-ए-उल्फत की - नतीजा

 ● कोयलिया बोले दिल मोरा डोले - हमजोली

 ● भीगी-भीगी पलकें हैं - बेला

 ● मन गीत सुहाने गये क्यों - परायी आग

 ● हम आपको ही चाहेंगे - परदा

 ● मनवा मैं प्यार डोले - सतरंज

 ● समझ लो नज़र से इशारा - कश्मीर

 ● सावन के बादलों - रतन

 ● फिर आह दिल से निकली - मेला

 ● तेरी उम्मीद मैं हमने - धुन

 ● रम  झूम बरसे बदावा - रतन

 ● ऋतु रंगीली आई - मिर्जा साहिबान

 ● आँखों में इंतज़ार - कारवां

 ● ये रात फिर ना आएगी - महल

 ● मोहे बांका बलम लागे पियार - बेला

 ● मेरा हुस्न लुटाने आया - चन्द्रलेखा

 ● कौन जीवन में मेरे - हमारा संसार

 ● मेरे आये हैं तीन भाभी - हम एक हैं

 ● सपनों में आने वाली गलियाँ - हम एक हैं

 ● अगर किसी से मोहब्बत ना - कश्मीर

 ● चूं चूं घुंघरवा बाजे - महल

 ● हो मोरे बाले उमरिया - नतीजा

 और भी कई.....


Thursday, February 20, 2025

जयश्री गडकर

#29aug #21feb 
अभिनेत्री जयश्री गडकर 
🎂21 फ़रवरी 1942, 
 कारवार
⚰️: 29 अगस्त 2008,
 मुंबई
पति: बाल धुरी
सन 1950 से 1980 के दशक तक मराठी और हिंदी सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री जयश्री गडकर का जन्म 21 फरवरी 1942 को कारवार, कर्नाटक में एक कोंकणी भाषी परिवार हुआ था । जयश्री ने रामानंद की रामायण से  कौशल्या की भूमिका निभाई थी जिसने जयश्री को सम्मान, गौरव, लोकप्रियता के साथ-साथ जीवनसाथी भी मिला यानि रामायण में दशरथ का किरदार निभाने वाले “बाल धुरी” के साथ वह शादी के बंधन में बंध गईं।  उनकी प्रतिभा, नृत्य कौशल और सौंदर्य के सभी कायल थे।राजश्री ने फिल्म ‘तमाशा’ में बाल नृत्य कलाकार के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी, व्ही. शांताराम की ‘झनक झनक पायल’ बाजे में उन्होंने एक समूह नर्तकी के रूप में अपने नृत्य कौशल का प्रदर्शन किया था। 29  अगस्त 2008  को  जयश्रीजी का निधन हो गया
🎥
संगू काशी में 
चंदोबा चंदोबा भागलस का
घरकुल
अवघाची संसार
गठ पडली थका थका
आलिया भोगसी
सून लड़की या घरची 
जिव्हाला 
थांब लक्ष्मी कुंकु लावटे 
1954 सुबह का तारा
1955 सावित्री
1959 सांगते आइका
1959 मदारी
1960 पुलिस जासूस
1960 पंचरती
1960 बिंद्या
1960 अवघाची संसार
1961 ससुराल
1961 सारंगा
1961 मंटिनी 
1962 बाप माझा ब्रह्मचारी
1962 सुख आले मझ्या दारी
1962 निजी सचिव
1963 सुभद्रा हरण
1963 पडाडा
1963 मोहित्यांची मंजुला
1963 मेरे अरमान मेरे सपने
1964 महासती अनुसूया
1964 सवाल माज़ा आइका
1965 मल्हारी मार्तण्ड
1965 आई कुना म्हानु मी
1965 साधी मनसा (1965)
1965 गोपाल - कृष्ण
1965 आई कुना म्हानु मी
1966 पाटलाची सून
1967 सुरंगा महंत्यात माला
1967 लव-कुश
1967 बहारों के सपने
1968 एक गाव बारा भंगाडी
1968 हर हर गंगे
1968 बलराम श्री कृष्ण
1970 दगाबाज़
1970 भगवान परशुराम
1971 आशिक एक रात
1971 लखत आशी देखानी
1971 तुलसी विवाह
1971 श्री कृष्ण लीला
1971 श्री कृष्णार्जुन युद्ध 
1971 कासा काई पाटिल बारा है का
1972 नाग पंचमी
1972 हरि दर्शन
1973 महासती सावित्री
1973 आई उड़े गा अम्बाबाई
1974 किसान और भगवान
1974 हर हर महादेव
1974 दावत
1974 भगत धन्ना जट्ट
1974 बालक ध्रुव
1975 एक गांव की कहानी
1976 बजरंगबली
1977 महिमा श्री राम की
1977 गायत्री महिमा
1978 अलादीन के रोमांच
1979 हर हर गंगे 
1980 कडकलक्ष्मी
1981 सनसनी: द सेंसेशन
1981 सून माज़ी लक्ष्मी
1981 जियो तो ऐसे जियो
1982 आव्हान
1983 सती नाग कन्या
1983 सम्पूर्ण महाभारत
1984 सुलागते अरमान
1984 सिंदूर का दान
1984 श्रवण कुमार
1984/II माया बाज़ार
1984 नया कदम
1985 मास्टरजी
1986 वीर भीमसेन
1986 पत्तों की बाजी
1986 कृष्णा-कृष्णा
1986 बिजली
1986 रामायण (टीवी श्रृंखला)
1987 शेर शिवाजी
1987 पूर्णसत्य
1987 खूनी दरिंदा
1987 नज़राना
1987 भटक भवानी
1988 मार् मितेन्ग
1989 ईश्वर
1989 कानून अपना अपना
1990 अमीरी ग़रीबी
1991 बम्बई से मॉरीशस
1992 मालमसाला
1997 लव कुश
2000 सौभाग्यदान

Wednesday, February 19, 2025

राज नैना

#18sep #21feb 
 राजा नेने 
🎂18 सितंबर 1912 
⚰️21 फ़रवरी 1975
 का जन्म गजानन हरि नेने के रूप में हुआ था। वे एक निर्देशक और अभिनेता थे, जिन्हें 10 ओ'क्लॉक (1942), राधा कृष्ण (1954) और रामशास्त्री (1944) के लिए जाना जाता है। उन्होंने मराठी, हिंदी और गुजराती फ़िल्मों में काम किया। 
गजानन हरि नेने उर्फ़ राजा नेने विष्णुपंत दामले के भतीजे थे, जिन्होंने उन्हें प्रभात स्टूडियो में सहायक निर्देशक के रूप में नौकरी दिलवाई थी। उन्होंने 'चंद्रसेना' (1935) और 'अमर ज्योति' (1936) में वी. शांताराम की सहायता की।  वे "संत तुकाराम" (1936) और उसके बाद बनी दामले-फत्तेलाल फिल्मों के निर्माण में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति थे, जिन्हें संत साखू के लिए सह-क्रेडिट मिला। उन्होंने शांताराम की मराठी में क्लासिक कुंकू और हिंदी में दुनिया ना माने में काकासाहेब के बेटे, बूरीश पंडित की भूमिका निभाई। उन्होंने प्रभात में मराठी में सफल "दहा वजता" का निर्देशन किया। आठवले, दत्ता धर्माधिकारी और केशवराव भोले के साथ, वे कुछ ही समय बाद स्टूडियो से बाहर चले गए, जिससे स्टूडियो की महान कृति "रामशास्त्री" (1944) अधूरी रह गई।  समूह ने मोहन स्टूडियो के साथ मिलकर "तारामती" बनाई। उन्होंने धर्माधिकारी की पहली फिल्म "शादी से पहले" का सह-निर्देशन करते हुए अपना खुद का राजा नेने प्रोडक्शन (1947) शुरू किया। राजकमल कलामंदिर के बाद, नेने प्रोडक्शन प्रभात स्टूडियो से निकलने वाला दूसरा प्रमुख प्रोडक्शन हाउस था और उसके बाद धर्माधिकारी की अल्हड़ चित्रा आई। नेने का अगला प्रोडक्शन क्लासिक तमाशा संगीतमय पट्ठे बापूराव था, जिसमें उन्होंने मुख्य भूमिका खुद के लिए सुरक्षित रखी। अनंत माने ने बाद में दावा किया कि उन्होंने इस हिट के साथ-साथ केतकीच्य बनात का भी निर्देशन किया था। नेने की सबसे सफल हिंदी फिल्म पहली तारीख को पी. नीलकांतन ने मोडालटेडी (1955) के रूप में कन्नड़ और तमिल में रीमेक किया।

राजा नेने का निधन 21 फरवरी 1975 को बॉम्बे (मुंबई), महाराष्ट्र में हुआ। 

 🎥राजा नेने (हिंदी) की फिल्मोग्राफी -

1937 दुनिया ना  माने - अभिनेता 
1939 आदमी - सहायक निर्देशक 
1940 संत ज्ञानेश्वर - सहायक निर्देशक 
1941 संत साखू - निर्देशक, अभिनेता पडोसी - संपादक 1942 10 बजे - निर्देशक 1944 रामशास्त्री - निर्देशक, अभिनेता 1945 तारामती - निर्देशक 
1946 बच्चों का खेल - निर्देशक फिर भी अपना है - निर्देशक 
1947 शादी से पहले - अभिनेता, निर्देशक और निर्माता लालत - निर्देशक 
19 49 मैं अबला नहीं हूं - अभिनेता 
1951 श्री विष्णु भगवान - निर्देशक भाई का प्यार - निर्देशक 
1952 इंद्रासन - निर्देशक लंका दहन - निर्देशक राज रानी दमयंती - निर्देशक नन्हे मुन्ने - अभिनेता 
1953 भाग्यवान - अभिनेता महात्मा - अभिनेता 
1954 हनुमान जन्म - निर्देशक राधा कृष्ण - निर्देशक पहली तारीख - अभिनेता, निर्देशक और निर्माता कलाकार - अभिनेता 
1955 हा हा ही ही  हू हू - निर्माता
 1957 बेगुनाह - अभिनेता 1958 गौरी शंकर - निर्देशक 
1960 श्रीमान सत्यवादी - अभिनेता 
1963 सुभद्रहरण - अभिनेता कान कान मेन भगवान - अभिनेता 
1965 पूर्णिमा - अभिनेता 
1966 नागिन और सपेरा - अभिनेता 

🎥राजा नेने की मराठी और गुजराती फिल्में - 
1975 ओवलाइट भौराया - अभिनेता 1974 कार्तिकी - अभिनेता 
1973 आलय तूफ़ान दरियाला - अभिनेता 
1971 मेही मानुस आहे - अभिनेता 1966 अति शाना तयाच - अभिनेता 1964 सुभद्रा हरण - अभिनेता पाथलाग - अभिनेता श्रीमान बालासाहेब - अभिनेता तुका झलासे कलस - निर्देशक यालच मंतत प्रेम - अभिनेता 
1963 फकीरा - अभिनेता जिवनो जुगारी - अभिनेता (गुजराती फिल्म) 
1962 गवाची  इज्जत - अभिनेता सप्तपदी - अभिनेता 
1960 स्वयंवर जले सीताचे - अभिनेता 1959 प्रतिभा - अभिनेता याला जीवन ऐसे नाव - निर्देशक 
1958 लग्नधि घटस्पॉट - अभिनेता शुभग्यवती भाव - अभिनेता 
1957 फिले प्रेम - अभिनेता और निर्देशक 1956 कहीं खार नहीं - अभिनेता 
1954 शुभ मंगल - निर्माता
 1953 अबोली - अभिनेता सोनेरी सावली - अभिनेता 
1952 नी पाखरे - अभिनेता 
1951 बाला जो जो रे - अभिनेता 
1950 केतकिचा अनात - अभिनेता और निर्देशक पथे बापुराव - अभिनेता और निर्देशक 
1949 संत रामदास - अभिनेता, निर्माता और निर्देशक 
1942 दाहा वाजता - निर्देशक 
1941 संत सखू - निर्देशक शेजारी - सहायक संपादक
 1939 मानूस सहायक - निर्देशक 
1937 कुंकु - अभिनेता, 

Monday, June 3, 2024

नूतन

#04jun 
#21feb 
नूतन
तारीख 04 जून 1936, 
मुम्बई
मृत्यु  21 फ़रवरी 1991,
 ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल ट्रस्ट, मुम्बई
पति: रजनीश बहल (विवा. 1959–1991)
बच्चे: मोहनीश बहल
माता-पिता: शोभना समर्थ, कुमारसेन समर्थ
पुरस्कार
सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री
1956 सीमा
1960 सुजाता
1964 बंदिनी
1968 मिलन
1979 मैं तुलसी तेरे आँगन की
सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री
1986 मेरी जंग
हिन्दी सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्री थीं। नूतन के सौन्दर्य को मिस इंडिया पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वह इस पुरस्कार को पाने वाली पहली महिला थीं। नूतन ने 50 से भी अधिक फ़िल्मों में काम किया और उन्हे बहुत से अन्य पुरस्कारों के अलावा 6 बार फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार मिला (जिसकी बराबरी उनकी भतीजी काजोल ने की है)।
नूतन का जन्म 04 जून 1936 को एक पढे-लिखे और सभ्रांत परिवार में हुआ था। इनकी माता का नाम श्रीमती शोभना समर्थ और पिता का नाम श्री कुमारसेन समर्थ था। नूतन ने अपने फ़िल्मी जीवन की शुरुआत1950 में की थी जब वह स्कूल में ही पढ़ती थीं।

 11अक्टूबर 1959को नूतन ने लेफ़्टिनेंट कमांडर रजनीश बहल से विवाह कर लिया।नूतन के पुत्र मोहनीश बहल भी हिन्दी फ़िल्मों में अभिनय करते हैं। नूतन की बहन तनुजा और भतीजी काजोल भी हिन्दी सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्रियों में शामिल हैं। नूतन के अभिनय को हिन्दी फ़िल्म उद्दोग के सभी बडे नामों ने सराहा है और वह आज भी बहुत सी अदाकाराओं का आदर्श बनी हुई हैं।

नूतन का देहांत फरवरी 1991 को कर्क रोग के कारण हुआ।
🎥
1950 हमारी बेटी 
1951
 नगीना 
हम लॉग 
1952 
शीशम 
पर्वत 
1953
 लैला मजनू 
आघोष
मॉल्किन 
1954 शबाब 
1955 सीमा
1956 हीर
1957 
बारिश 
सशुल्क अतिथि 
जिंदगी या तूफान
1958 
चंदन 
दिल्ली का ठग
कभी अँधेरा कभी उजाला 
सोने की चिड़िया 
आखिरी दाओ 
लाइट हाउस
1959 
अनाड़ी आरती 
कन्हैया 
सुजाता
1960 
बसंत 
छबीली 
छलिया
मंज़िल
1962 सूरत और सीरत
1963 
बंदिनी
दिल ही तो है 
तेरे घर के सामने
1964 चांदी की दीवार
1965
 खानदान
रिश्ते नाते
1966 
छोटा भाई
दिल ने फिर याद किया
1967 
दुल्हन एक रात की
लाट साहब 
मिलन 
मेहरबान
मेरा मुन्ना
1968 
गौरी 
सरस्वतीचंद्र
1969 भाई बहन
1970 
माँ और ममता 
देवी 
महाराजा
यादगार
1971 
डूबा हुआ जहाज़
ग्रहण 
मंगेतर
1973 सौदागर
1975 जोगीदास खुमान 
1976 ज़िद
1977 
मंदिर मस्जिद 
जागृति 
दुनियादारी
पारध
1978 
एक बाप छे बेटे
मै तुलसी तेरे आंगन की
साजन बिना सुहागन
हमारा संसार
1980 
कस्तूरी 
सांझ की बेला
1981 साजन की सहेली
1982 
तेरी मांग सितारों से भर दूं कामिनी 
जियो और जीने दो
1983 रिश्ता कागज़ का
1985 
युद्ध 
पैसा ये पैसा
मेरी जंग
ये कैसा फ़र्ज़ 
प्यारी भाभी
1986 
सजना साथ निभाना 
कर्मा
का नाम ले 
रिकी
1987 हिफाज़त
1988 सोने पे सुहागा
1989 
मुजरिम 
कानून अपना अपना
गुरु
1990 औलाद की खातिर 
1991 गराजना
1992
नसीबवाला 
दीवाना आशिक
1994 इंसानियत

करण सिंह ग्रोवर

करन सिंह ग्रोवर 🎂जन्म की तारीख और समय: 23 फ़रवरी 1982 , नई दिल्ली पत्नी: बिपाशा बसु (विवा. 2016), जेनिफर विंगेट (विवा. 2012–2014), करन सिंह...