अभिनेता ए के हंगल
🎂01फरवार 19 17 पाकिस्तान सियालकोट
⚰️26 अगस्त 2012, मुंबई
अवतार किशन हंगल हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता एवं दूरदर्शन कलाकार थे। वर्ष 1967 से हिन्दी फ़िल्म उद्योग का हिस्सा रहे हंगल ने लगभग 225 फ़िल्मों में काम किया। उन्हें फ़िल्म 'परिचय' और 'शोले' में अपनी यादगार भूमिकाओं के लिए जाना जाता है।
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले ए.के. हंगल का जन्म 1 फ़रवरी 1917 को कश्मीरी पंडित परिवार में अविभाजित भारत में पंजाब राज्य के सियालकोट में हुआ था। इनका पूरा नाम अवतार किशन हंगल था। कश्मीरी भाषा में हिरन को हंगल कहते हैं। उन्होंने हिंदी सिनेमा में कई यादगार रोल अदा किए। वर्ष 1966 में उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा और 2005 तक 225 फ़िल्मों में काम किया। राजेश खन्ना के साथ उन्होंने 16 फ़िल्में की थी। हंगल साहब उर्दू भाषी थे। उन्हें हिंदी में स्क्रिप्ट पढ़ने में परेशानी होती थी। इसलिए वे स्क्रिप्ट हमेशा उर्दू भाषा में ही मांगते थे।
कश्मीरी ब्राह्मणों का यह परिवार बहुत पहले लखनऊ में बस गया था। लेकिन हंगल साहब के जन्म के डेढ़-दो सौ साल पहले वे लोग पेशावर चले गये थे। इनके दादा के एक भाई थे जस्टिस शंभुनाथ पंडित, जो बंगाल न्यायालय के प्रथम भारतीय जज बने थे। हंगल साहब के पिता उन्हें पारसी थियेटर दिखाने ले जाया करते थे। वहीं से नाटकों के प्रति शौक़ उत्पन्न हुआ। हंगल साहब शुरुआती दौर से ही कभी किसी काम को छोटा नहीं समझते थे।
इनका बचपन पेशावर में गुजरा, यहां उन्होंने थिएटर में अभिनय किया। इनके पिता का नाम पंडित हरि किशन हंगल था। अपने जीवन के शुरुआती दिनों में, जब वे कराची में रहते थे, वहां उन्होंने टेलरिंग का काम भी किया है। पिता के सेवानिवृत्त होने के बाद पूरा परिवार पेशावर से कराची आ गया। 1949 में भारत विभाजन के बाद ए.के. हंगल मुंबई चले गए। 21 की उम्र में 20 रुपये लेकर पहली बार मुंबई आए थे। ये बलराज साहनी और कैफी आजमी के साथ थिएटर ग्रुप आईपीटीए के साथ जुड़े थे।
उन्होंने इप्टा से जुड़ कर अपने नाटकों के मंचन के माध्यम से सांस्कृतिक चेतना जगायी। हंगल साहब पेंटिंग भी करते थे। उन्होंने किशोर उम्र में ही एक उदास स्त्री का स्केच बनाया था और उसका नाम दिया चिंता। वे हमेशा अपनी फ़िल्मों से ज्यादा अपने नाटक को अहमियत देते थे और मानते थे कि ज़िंदगी का मतलब सिर्फ अपने बारे में सोचना नहीं है। वे हमेशा कहते थे कि चाहे कुछ भी हो जाये, ‘मैं एहसान-फरामोश और मतलबी नहीं बन सकता।’
भारत की आज़ादी की लड़ाई में भी इनकी भागीदारी थी। 1930-47 के बीच स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रहे। दो बार जेल गए। हंगल तीन साल पाकिस्तान में जेल में रहे। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पेशावर में काबुली गेट के पास एक बहुत बड़ा प्रदर्शन हुआ था, जिसमें हंगल साहब भी उपस्थित थे। अंग्रेजों ने अपने सिपाहियों को प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का हुक्म दिया था, लेकिन चंदर सिंह गढ़वाली के नेतृत्व वाले उस गढ़वाल रेजीमेंट की टुकड़ी ने गोली चलाने से इनकार कर दिया। यह एक विद्रोह था। चंदर सिंह गढ़वाली को जेल में डाला गया। हंगल साहब को दु:ख था कि चंदर सिंह गढ़वाली को ‘भारत रत्न’ नहीं मिला। भारत माँ का यह वीर सपूत 1981 में गुमनाम मौत मरा। पेशावर में हुआ नरसंहार उसी काबुल गेट वाली घटना के बाद हुआ था। उस वक्त अंग्रेजों ने अमेरिकी से गोलियाँ चलवाई थीं। हंगल साहब ने अपनी आँखों से यह सब देखा था। यही वजह रही कि वे थियेटर से जुड़ने के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक आंदोलनों को लेकर हमेशा सजग रहते थे।
भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फाँसी से बचाने के लिए चलाये गये हस्ताक्षर अभियान में भी वे शामिल थे। किस्सा-ख्वानी बाज़ार नरसंहार के दौरान उनकी कमीज ख़ून से भीग गयी थी। हंगल साहब कहते थे, ‘वह ख़ून सभी का था- हिंदू, मुस्लिम, सिख सबका मिला हुआ खून!’ छात्र जीवन से ही वे बड़े क्रांतिकारियों की मदद में जुट गये थे। बाद में उन्हें अंग्रेजों ने तीन साल तक जेल में भी रखा, फिर भी वे अपने इरादे से नहीं डिगे
ए.के. हंगल 50 वर्ष की उम्र में हिंदी सिनेमा में आए। उन्होंने 1966 में बासु चटर्जी की फ़िल्म 'तीसरी कसम' और 'शागिर्द' में काम किया। इसके बाद उन्होंने सिद्घांतवादी भूमिकाएँ निभाई। 70, 80 और 90 के दशकों में उन्होंने प्रमुख फ़िल्मों में पिता या अंकल की भूमिका निभाई। हंगल ने फ़िल्म शोले में रहीम चाचा (इमाम साहब) और 'शौकीन' के इंदर साहब के किरदार से अपने अभिनय की छाप छोड़ी। इंडियन पीपुल्स थिएटर एसोसिएशन (इप्टा) के साथ बढ़-चढ़कर काम करने वाले हंगल ने 139 से अधिक फिल्मों में अपने अभिनय कौशल का लोहा मनवाया है। इनके प्रमुख रोल फ़िल्म 'नमक हराम', शौकीन, शोले, आईना, अवतार, अर्जुन, आंधी, तपस्या, कोरा कागज, बावर्ची, छुपा रुस्तम, चितचोर, बालिका वधू, गुड्डी, नरम-गरम में रहे। इनके बाद के समय में यादगार किरदारों में वर्ष 2002 में शरारत, 1997 में तेरे मेरे सपने और 2005 में आमिर खान के साथ लगान में नज़र आए थे।
वर्ष 2006 में उन्हें भारत सरकार ने पद्मभूषण से नवाजा।
टीवी सीरियल में उपस्थिति
1997 में बॉम्बे ब्लू
1998 में जीवन रेखा
1986 में मास्टरपीस थिएटर : लार्ड माउंटबेटन
1996 में चंद्रकांता
1993-94 में जबान संभाल के में छोटी भूमिका
2004-05 में होटल किंग्सटन में छोटी भूमिका
2012 में धारावाहिक कलर्स चैनल के धारावाहिक मधुबाला में विशेष उपस्थित
हंगल लम्बे समय से बुढ़ापे की बीमारियों से पीड़ित रहे। बॉलीवुड के सबसे वयोवृद्ध अभिनेता ए. के. हंगल का 26 अगस्त 2012 को सुबह नौ बजे के क़रीब मुंबई के आशा पारेख अस्पताल में निधन हो गया था। 95 साल के हंगल को 16 अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 13 अगस्त को हंगल गिर गए थे। पीठ में चोट लगने और कूल्हे की हड्डी टूटने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उनकी सर्जरी हुई। सर्जरी होने के बावजूद उनती सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ। बाद में पता चला कि उन्हें सीने में दर्द और सास लेने में तकलीफ़ है। इसके बाद उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया, लेकिन उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ।
🎂01फरवार 19 17 पाकिस्तान सियालकोट
⚰️26 अगस्त 2012, मुंबई
अवतार किशन हंगल हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता एवं दूरदर्शन कलाकार थे। वर्ष 1967 से हिन्दी फ़िल्म उद्योग का हिस्सा रहे हंगल ने लगभग 225 फ़िल्मों में काम किया। उन्हें फ़िल्म 'परिचय' और 'शोले' में अपनी यादगार भूमिकाओं के लिए जाना जाता है।
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले ए.के. हंगल का जन्म 1 फ़रवरी 1917 को कश्मीरी पंडित परिवार में अविभाजित भारत में पंजाब राज्य के सियालकोट में हुआ था। इनका पूरा नाम अवतार किशन हंगल था। कश्मीरी भाषा में हिरन को हंगल कहते हैं। उन्होंने हिंदी सिनेमा में कई यादगार रोल अदा किए। वर्ष 1966 में उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा और 2005 तक 225 फ़िल्मों में काम किया। राजेश खन्ना के साथ उन्होंने 16 फ़िल्में की थी। हंगल साहब उर्दू भाषी थे। उन्हें हिंदी में स्क्रिप्ट पढ़ने में परेशानी होती थी। इसलिए वे स्क्रिप्ट हमेशा उर्दू भाषा में ही मांगते थे।
कश्मीरी ब्राह्मणों का यह परिवार बहुत पहले लखनऊ में बस गया था। लेकिन हंगल साहब के जन्म के डेढ़-दो सौ साल पहले वे लोग पेशावर चले गये थे। इनके दादा के एक भाई थे जस्टिस शंभुनाथ पंडित, जो बंगाल न्यायालय के प्रथम भारतीय जज बने थे। हंगल साहब के पिता उन्हें पारसी थियेटर दिखाने ले जाया करते थे। वहीं से नाटकों के प्रति शौक़ उत्पन्न हुआ। हंगल साहब शुरुआती दौर से ही कभी किसी काम को छोटा नहीं समझते थे।
इनका बचपन पेशावर में गुजरा, यहां उन्होंने थिएटर में अभिनय किया। इनके पिता का नाम पंडित हरि किशन हंगल था। अपने जीवन के शुरुआती दिनों में, जब वे कराची में रहते थे, वहां उन्होंने टेलरिंग का काम भी किया है। पिता के सेवानिवृत्त होने के बाद पूरा परिवार पेशावर से कराची आ गया। 1949 में भारत विभाजन के बाद ए.के. हंगल मुंबई चले गए। 21 की उम्र में 20 रुपये लेकर पहली बार मुंबई आए थे। ये बलराज साहनी और कैफी आजमी के साथ थिएटर ग्रुप आईपीटीए के साथ जुड़े थे।
उन्होंने इप्टा से जुड़ कर अपने नाटकों के मंचन के माध्यम से सांस्कृतिक चेतना जगायी। हंगल साहब पेंटिंग भी करते थे। उन्होंने किशोर उम्र में ही एक उदास स्त्री का स्केच बनाया था और उसका नाम दिया चिंता। वे हमेशा अपनी फ़िल्मों से ज्यादा अपने नाटक को अहमियत देते थे और मानते थे कि ज़िंदगी का मतलब सिर्फ अपने बारे में सोचना नहीं है। वे हमेशा कहते थे कि चाहे कुछ भी हो जाये, ‘मैं एहसान-फरामोश और मतलबी नहीं बन सकता।’
भारत की आज़ादी की लड़ाई में भी इनकी भागीदारी थी। 1930-47 के बीच स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रहे। दो बार जेल गए। हंगल तीन साल पाकिस्तान में जेल में रहे। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पेशावर में काबुली गेट के पास एक बहुत बड़ा प्रदर्शन हुआ था, जिसमें हंगल साहब भी उपस्थित थे। अंग्रेजों ने अपने सिपाहियों को प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का हुक्म दिया था, लेकिन चंदर सिंह गढ़वाली के नेतृत्व वाले उस गढ़वाल रेजीमेंट की टुकड़ी ने गोली चलाने से इनकार कर दिया। यह एक विद्रोह था। चंदर सिंह गढ़वाली को जेल में डाला गया। हंगल साहब को दु:ख था कि चंदर सिंह गढ़वाली को ‘भारत रत्न’ नहीं मिला। भारत माँ का यह वीर सपूत 1981 में गुमनाम मौत मरा। पेशावर में हुआ नरसंहार उसी काबुल गेट वाली घटना के बाद हुआ था। उस वक्त अंग्रेजों ने अमेरिकी से गोलियाँ चलवाई थीं। हंगल साहब ने अपनी आँखों से यह सब देखा था। यही वजह रही कि वे थियेटर से जुड़ने के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक आंदोलनों को लेकर हमेशा सजग रहते थे।
भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फाँसी से बचाने के लिए चलाये गये हस्ताक्षर अभियान में भी वे शामिल थे। किस्सा-ख्वानी बाज़ार नरसंहार के दौरान उनकी कमीज ख़ून से भीग गयी थी। हंगल साहब कहते थे, ‘वह ख़ून सभी का था- हिंदू, मुस्लिम, सिख सबका मिला हुआ खून!’ छात्र जीवन से ही वे बड़े क्रांतिकारियों की मदद में जुट गये थे। बाद में उन्हें अंग्रेजों ने तीन साल तक जेल में भी रखा, फिर भी वे अपने इरादे से नहीं डिगे
ए.के. हंगल 50 वर्ष की उम्र में हिंदी सिनेमा में आए। उन्होंने 1966 में बासु चटर्जी की फ़िल्म 'तीसरी कसम' और 'शागिर्द' में काम किया। इसके बाद उन्होंने सिद्घांतवादी भूमिकाएँ निभाई। 70, 80 और 90 के दशकों में उन्होंने प्रमुख फ़िल्मों में पिता या अंकल की भूमिका निभाई। हंगल ने फ़िल्म शोले में रहीम चाचा (इमाम साहब) और 'शौकीन' के इंदर साहब के किरदार से अपने अभिनय की छाप छोड़ी। इंडियन पीपुल्स थिएटर एसोसिएशन (इप्टा) के साथ बढ़-चढ़कर काम करने वाले हंगल ने 139 से अधिक फिल्मों में अपने अभिनय कौशल का लोहा मनवाया है। इनके प्रमुख रोल फ़िल्म 'नमक हराम', शौकीन, शोले, आईना, अवतार, अर्जुन, आंधी, तपस्या, कोरा कागज, बावर्ची, छुपा रुस्तम, चितचोर, बालिका वधू, गुड्डी, नरम-गरम में रहे। इनके बाद के समय में यादगार किरदारों में वर्ष 2002 में शरारत, 1997 में तेरे मेरे सपने और 2005 में आमिर खान के साथ लगान में नज़र आए थे।
वर्ष 2006 में उन्हें भारत सरकार ने पद्मभूषण से नवाजा।
टीवी सीरियल में उपस्थिति
1997 में बॉम्बे ब्लू
1998 में जीवन रेखा
1986 में मास्टरपीस थिएटर : लार्ड माउंटबेटन
1996 में चंद्रकांता
1993-94 में जबान संभाल के में छोटी भूमिका
2004-05 में होटल किंग्सटन में छोटी भूमिका
2012 में धारावाहिक कलर्स चैनल के धारावाहिक मधुबाला में विशेष उपस्थित
हंगल लम्बे समय से बुढ़ापे की बीमारियों से पीड़ित रहे। बॉलीवुड के सबसे वयोवृद्ध अभिनेता ए. के. हंगल का 26 अगस्त 2012 को सुबह नौ बजे के क़रीब मुंबई के आशा पारेख अस्पताल में निधन हो गया था। 95 साल के हंगल को 16 अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 13 अगस्त को हंगल गिर गए थे। पीठ में चोट लगने और कूल्हे की हड्डी टूटने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उनकी सर्जरी हुई। सर्जरी होने के बावजूद उनती सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ। बाद में पता चला कि उन्हें सीने में दर्द और सास लेने में तकलीफ़ है। इसके बाद उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया, लेकिन उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ।
🎥
1980 हम पाँच
1980 फ़िर वही रात
1980 जुदाई
1980 काली घटा
1979 मीरा
1979 खानदान
1978 देस परदेस
1978 नौकरी
1978 सत्यम शिवम सुन्दरम
1978 बदलते रिश्ते
1978 स्वर्ग नर्क
1978 तुम्हारे लिये
1978 बेशरम
1977 मुक्ति
1977 आइना
1977 ईमान धर्म
1977 पहेली
1977 कलाबाज़
1977 आलाप
1976 ज़िन्दगी
1976 चितचोर
1976 बालिका बधू
1976 तपस्या
1975 आँधी
1975 शोले
1975 दीवार
1975 अनोखा
1975 सलाखें
1974 विदाई
1975 सलाखें
1974 विदाई
1974 दूसरी सीता
1974 कोरा कागज़
1974 आप की कसम
1974 इश्क इश्क इश्क
1973 नमक हराम
1973 जोशीला
1973 अभिमान
1973 छुपा रुस्तम
1973 अनामिका
1973 दाग
1973 हीरा पन्ना
1972 परिचय
1972 जवानी दीवानी
1972 बावर्ची
1971 अनुभव
1971 नादान
1971 मेरे अपने
1971 गुड्डी
1969 सारा आकाश
1969 सात हिन्दुस्तानी
1967 तीसरी कसम
1967 शागिर्द
📺 टीवी सीरियल -
1986 डार्कनेस: टीवी मिनी-सीरीज़
मास्टरपीस थिएटर: भगवान
माउंटबेटन: द लास्ट वायसराय वल्लभभाई के रूप में
पटेल टीवी लघु श्रृंखला
1988 जीवन रेखा: टीवी श्रृंखला
1993-94 एक एपिसोड में ज़बान संभालके
1995 आहट सीज़न 1
1995-2001 जीवन मृत्यु : प्रकरण
120-121 मृत्यु के रूप में
1996 चंद्रकांता: परिचंद एक बूढ़ा आदमी
1997 बेताल पचीसी: बाबा
1997 बॉम्बे ब्लू: सरस्वती गिरी टीवी
लघु-श्रृंखला, एपिसोड 1 - 3 में सरस्वती गिरि के रूप में
2004-05 होटल किंग्स्टन: स्टार वन कैमियो इन टू
एपिसोड. पहले होटल में रात भर रुकने के लिए आता है और फिर होटल किंग्स्टन को दिवालिया होने से बचाने में आर्थिक मदद करता है 2012 मधुबाला: एक इश्क एक जुनून ए. के. हंगल (विशेष उपस्थिति)
🎥Filmography of A. K. Hangal -
1966 Teesri Kasam : Raj Kapoor's elder brother
1967 Shagird : Kedarnath Badri Narayan
1968 Bambai Rat Ki Bahon Mein : Sonadas
1969 Saat Hindustani : Doctor
Sara Akash : Mr. Thakur
Dharti Kahe Pukarke
1970 Heer Raanjha : Court Maulvi
1971 Guddi : Guddi's father
Nadaan : Seema's father
Anubhav : Hari
Mere Apne : College Principal
1972 Bawarchi : Ramnath Sharma (Munna)
Jawani Diwani : College Principal
Parichay : Jeetendra's maternal uncle
1973 Daag : A Poem of Love : Judge
Chhupa Rustam : Prof. Harbanslal
Rocky Mera Naam : Reeta's Father
Abhimaan : Sadanand
Joshila : Lala Gulzarilal
Namak Haraam : Bipinlal Pandey
Sweekar : Dr. Verma
Heera Panna : Diwan Karan Singh
Anamika : Shiv Prasad
Garm Hava : Ajmani, A Sindhi trader
1974 Nirmaan : Advocate
Aap Ki Kasam : Kamal's Father
Do Nambar Ke Amir Devakinandan
Kora Kagaz : Principal Gupta
Doosri Sita : Masterji - Babulal Wagle
Trimurti : Jagannath
Bidaai : Ramsharan
Us Paar : Mohan's father
Ishq Ishq Ishq : Guruji
1975 Deewaar : Chander's Father
Aandhi : Brinda kaka
Anokha : Hridaynath
Sholay : Imaam Saheb Rahim Chacha
Salaakhen : Ram Lal, Seema's father
Zid
1976 Sankoch : Gurucharan
Balika Badhu : Masterji
Zindagi : Doctor
Tapasya : Chandranath Sinha
Raees
1976 Mera Jiwan : Medical College Dean
Jeevan Jyoti : Raja Kamlakar
Chitchor : Pitamber Choudhry
Aaj Ka Ye Ghar : Dinanath
1977 Immaan Dharam : Masterji
Aaina : Ram Shastri
Alaap Pandit : Guest Appearance
Mukti : Colonel
Chala Murari Hero Banne
Paheli : Masterji
Kalabaaz : Poojary
Aafat
1978 Jogi
Badalte Rishtey : Professor
Satyam Shivam Sundaram:
Besharam : Ramchandra
Naukri : Ranjit's Father
Des Pardes : Pujari
Tumhare Liye : Bhavani
Swarg Narak : Geeta's Father
Chakravyuha : Nandita's Father
1979 Prem Bandhan
Inspector Eagle : Anthony Pinto
Jurmana : Nandlal's Mamaji
Meera : Saint Raidas
Khandaan : Masterji, Usha's father
Manzil : Anokhelal
Ladke Baap Se Badke : Principal
Zulm Ki Pukar
Ratnadeep
Amar Deep : Ramu kaka
1980 Kali Ghata : Deewan
Kashish : Ramesh's father
Thodisi Bewafaii : Arvind Choudhary
Phir Wohi Raat : Vishwanath
Neeyat : Dinanath
Humkadam : Raghunath Gupta
Hum Paanch : Pandit
Judaai : Narayan Singh, Gauri's father
1981 Krodhi : Masterji, Kumar's father
Naram Garam Vishnuprasad Masterji
Kalyug : Bhisham Chand
Kudrat : Billi Ram
Baseraa : Sharda's father
Kahani Ek Chor Ki
Nai Imarat : Pyarelal
Kal Hamara Hai & Bhaaya
1982 Saath Saath : Professor Chaudhary
Shriman Shrimati : Vishwanath Gupta
Bemisal Dr. Goyal Guest Appearance
Shaukeen : Inder Sen, Anderson
Dil... Akhir Dil Hai : Ashok Mehta
Khuddaar : Rahim Chacha
Star : Mr. Verma
Swami Dada : Swami Satyanand
1983 Suzanne
Avtaar : Rashid Ahmed
Naukar Biwi Ka : Sheela's father
1984 Sardaar Baba
Aaj Ka M.L.A. : Ram Avtar Tripathi
Sharaabi : Meena's Blind Father
Yaadon Ki Zanjeer : Shambhu Nath
Kamla : Kakasaab, Sarita's uncle
Kahan Tak Aasmaan Hai
Bandh Honth
1985 Saaheb : Doctor
Pighalta Aasman : Anuradha's father
Arjun : Mr. Malvankar
Bewafai : Harihar Nath
Ram Teri Ganga Maili : Brij Kishore
Surkhiyan :The Headlines
Saagar : Baba (in the lighthouse)
Meri Jung : Advocate Gupta
1986 Ek Chadar Maili Si : Trilok's father
Waapsi
New Delhi Times : Vikas' father
1987 Su-Raaj
Jalwa : Jojo's father
Dacait : Bighu Chacha
Satyamev Jayate : Mr. Shastri
Sindoor : Pandit
Jaan Hatheli Pe
Mera Yaar Mera Dushman
Jaago Hua Savera
1988 Khoon Bhari Maang : Ramu Kaka
Aakhri Adaalat : Retired Judge Kapoor
Apne Begaane
Ilaaka : School Master, Vidya's father
Abhimanyu : Shyam Lal
Mamata Ki Chhaon Mein : Acharya
1990 Police Public : Ram Swarup
1991 Farishtay : Abdul
Dushman Devta : Suraj's Father
1992 Meera Ka Mohan : Pujari
Apradhi : Vishembhar Nath
Laat Saab : Dinanath & D'Mello
1993 Roop Ki Rani Choron Ka Raja
Khalnayak : Shaukat Bhai
Jaagruti : Raghunath
1994 Dilwale : Inmate
1995 Ghar Ka Kanoon, Live Today
Kismat : Nanaji
1996 Sautela Bhai :
Tere Mere Sapne : Dattabhau
1998 Zor : Never Underestimate the Force
Main Solah Baras Ki
Yeh Aashiqui Meri : Mr. Joshi
1999 Thakshak : Homeless teacher
2001 Lagaan : Once Upon a Time in India
Dattak : The Adopted Babu ji
2002 Shararat : Gajanan Desai
2003 Kahan Ho Tum : Ghanshyamji,
2004 Hari Om : Old Man
Dil Maange More : Himself
2005 Sab Kuch Hai Kuch Bhi Nahin
Paheli : Jeevraj
Mr. Prime Minister
2008 Humsey Hai Jahaan
2012 Krishna Aur Kans : Ugrasen Voice (final film
role)
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