शोभना समर्थ 🎂17 नवंबर 1916⚰️09 फरवरी 2000
जन्म की तारीख और समय: 17 नवंबर 1916, मुम्बई
मृत्यु की जगह और तारीख: 9 फ़रवरी 2000, पुणे
बच्चे: तनुजा, नूतन, चतुरा समर्थ, रमेश समर्थ
पति: कुमारसेन समर्थ
माता-पिता: रतन बाई, पी० एस० शिलोत्री
पार्टनर: मोतीलाल
शोभना समर्थ (17 नवंबर 1916 - 9 फरवरी 2000) एक भारतीय फिल्म अभिनेत्री, निर्देशक और निर्माता थीं, जिन्होंने हिंदी फिल्म उद्योग में टॉकी फिल्मों के शुरुआती दिनों में अपना कैरियर शुरू किया था, और 1950 के दशक में प्रमुख नायिकाओं में रहीं उन्होंने मराठी सिनेमा में शुरुआत की उनकी पहली हिंदी फिल्म निगाहें नफ़रत, 1935 में रिलीज़ हुई थी उन्हें राम राज्य (1943) में सीता के किरदार के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाता है। 1997 में, उन्हें कला में उनके योगदान के लिए फिल्मफेयर स्पेशल अवार्ड से सम्मानित किया गया
समर्थ ने बाद में कई फिल्मों का निर्माण और निर्देशन किया, जिसमें उनकी बेटियों नूतन और तनुजा के कैरियर की शुरुआत हुई
शोभना का जन्म 17 नवंबर 1916 को बंबई, ब्रिटिश भारत में सरोज शिलोत्री के रूप में हुआ था वह अपने माता पिता की इकलौती संतान थी उसके पिता प्रभाकर शिलोत्री एक "अग्रणी बैंकर" थे जिन्होंने बॉम्बे में शिलोत्री बैंक शुरू किया था उनकी मां रतन बाई ने 1936 में मराठी (स्वराज्यच्य सेमेवार) में फिल्म फ्रंटियर्स ऑफ फ्रीडम में अभिनय किया शोभना ने शुरुआती तौर पर बॉम्बे के कैथेड्रल स्कूल में एक साल तक पढ़ाई की 1928 में, उनके पिता को आर्थिक नुकसान हुआ और व्यवसाय बंद हो गया । यह परिवार 1931 में बैंगलोर में स्थानांतरित हो गया, जहाँ शोभना बाल्डविन गर्ल्स हाई स्कूल में पढ़ती थी जीविकोपार्जन के लिए, उसके पिता ने निजी ट्यूशन दिए, जबकि उसकी माँ एक मराठी स्कूल में पढाती थी। उसी साल दिसंबर में, उनके पिता की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई और माँ और बेटी अपने मामा के साथ रहने के लिए बॉम्बे लौट आईं शोभना ने एक कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाई की फिल्मों से जुड़ने के कारण उनकी मैट्रिक की पढ़ाई पूरी नही हो सकी उनके मामा उनके फिल्मों में काम करने के विरोध में थे, और वह और उनकी माँ उनके घर को छोड़कर बाहर चले गयी (विडंबना यह है कि उनके मामा की बेटी और शोभना की ममेरी बहन नलिनी जयवंत खुद एक अभिनेत्री बन गईं)। शोभना ने पैसे कमाने के लिए निजी तौर पर ट्यूशन पढ़ाने लगी वह इस दौरान अपने भावी पति कुमारसेन समर्थ से मिलीं, जो अभी जर्मनी से लौटे थे और फिल्मों में निर्देशन के लिए उत्सुक थे उनकी सगाई हुई और उन्होंने अपनी पहली फिल्म पर काम शुरू कर किया
शोभना की पहली फ़िल्म कोल्हापुर सिनेटोन की"ऑर्फ़न्स ऑफ़ सोसाइटी" (1935) थी, जिसे निगाहे नफ़रत या विलासी ईश्वर भी कहा जाता है, जिसे विनायक ने निर्देशित किया इस फ़िल्म में विनायक और बाबूराव पेंढारकर ने अभिनय किया था फिल्म फ्लॉप हो गयी लेकिन शोभना को उनकी भूमिका के लिए समीक्षकों द्वारा सराहा गया फिल्म द्विभाषी थी, जिसे उर्दू और मराठी में बनाया गया था। शोभना ने एक साक्षात्कार में दावा किया कि फिल्मांकन के समय वह किसी भी तरह की उर्दू भाषा को नहीं जानती थी, रट्टा मारकर संवाद बोल रही थी और बाद में उन्होंने उर्दू भाषा सीखी तेरह महीने तक वह कोल्हापुर सिनेटोन में रही, लेकिन एक फिल्म में अभिनय किया
शोभना ने कोल्हापुर सिनेटोन छोड़ दिया और सागर मूवीटोन (सागर फिल्म कंपनी) में शामिल हो गई और उन्होंने कोकिला (1937) नामक एक फिल्म में अभिनय किया, जिसे सर्वोत्तम बादामी ने निर्देशित किया, जिसमें मोतीलाल, सबिता देवी और सितारा देवी ने अभिनय किया सागर के लिए दूसरी फिल्म थी दीवाने (1936), जिसका निर्देशन सी एम लुहार ने किया था और मोतीलाल, याकूब और अरुणा देवीे सह-कलाकार थे
1937 के अंत तक, शोभना ने सागर को छोड़ दिया और मोहन सिन्हा प्रेम अदीब और वस्ती द्वारा निर्देशित फ़िल्म इंडस्ट्रियल इंडिया (निराला हिंदुस्तान) में अभिनय करते हुए, जनरल फिल्म्स में शामिल हो गईं उनके लिए दूसरी फिल्म पति पत्नी (1939) वी एम गुंजल द्वारा निर्देशित थी इस फ़िल्म में उनके सह-कलाकार याकूब, सितार देवी और वास्ति थे
1939 तक, वह हिंदुस्तान सिनेटोन में शामिल हो गईं, उनके साथ चार फिल्में बनाईं फ़िल्म कौन किसी का (1939), सौभाग्य(1940) सी एम लुहार द्वारा निर्देशित फ़िल्म अपनी नगरिया(1940) वी एम गुंजल द्वारा निर्देशित फिल्में थी इसके बाद उन्होंने अपने पति कुमार सेन समर्थ द्वारा निर्देशित एक फ़िल्म घर जवाई (1941) में काम किया जहाँ उन्हें दामुन्ना मालवणकर के साथ कास्ट किया गया था
1942 में उनके कैरियर को नया मोड़ देने वाली फिल्म भरत मिलाप आयी यह फ़िल्म विजय भट्ट द्वारा निर्देशित थी और दुर्गा खोटे ने कैकेयी, शोभना समर्थ ने सीता और प्रेम अदीब में राम का किरदार अदा किया था इसके बाद 1943 में राम राज्य आया, और शोभना को सीता के रूप में पहचाना जाने लगा राम के रूप प्रेम अदीब सीता के रूप में शोभना बेहद लोकप्रिय हुईं और दर्शकों द्वारा उन्हें स्वीकार किया गया और उन्हें कैलेंडर पर राम और सीता के रूप में दिखाया गया।
शोभना का विवाह निर्देशक और छायाकार कुमारसेन समर्थ से विले पार्ले (ई), मुंबई में हुआ था उनकी तीन बेटियां थीं, नूतन, तनुजा और चतुर और एक बेटा जयदीप बाद में शोभना अभिनेता मोतीलाल राजवंश से जुड़ी
उनकी दो बेटियाँ, नूतन और तनुजा भी अभिनेत्री बनीं शोभना ने अपनी बेटियों के डेब्यू के लिए फिल्मों का निर्माण किया उनकी दूसरी बेटी चतुर, एक कलाकार है और उसका बेटा जयदीप एक विज्ञापन फिल्म निर्माता है चतुर और जयदीप ने कभी फिल्मों में अभिनय नहीं किया नूतन के बेटे मोहनीश बहल भी एक अभिनेता हैं, तनुजा की बेटियों काजोल और तनिष्ठा मुकर्जी काजोल ने अभिनेता अजय देवगन से शादी की है राजवंश के अन्य सदस्यों में शोमू मुखर्जी शामिल हैं, जिन्होंने तनुजा से शादी की
9 फरवरी 2000 में कैंसर से पुणे में उनकी मृत्यु हो गयी
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अभिनेत्री के रूप में
विलासी ईश्वर (1935)
निगाह-ए-नफ़रत (1935)
दो दीवाने (1936)
कोकिला (1937)
पति पत्नी (1939)
अपनी नगरिया (1940)
विलायती बाबू (1940)
सवेरा (1942)
विजय लक्ष्मी (1943)
राम राज्य (1943)
नौकर (1943)
महासती अनसूया (1943)
वीर कुणाल (1945)
तारामती (1945)
शाहकार (1947)
सती तोरल (1947)
मलिका (1947)
रामबाण (1948)
नरसिंह अवतार (1949)
हमारी बेटी (1950)
राम जन्म (1951)
इंसानियत (1955)
लव इन शिमला (1960)
छलिया (1960)
चित्रलेखा (1964)
नई उमर की नई फसल (1965)
वहां के लोग (1967)
एक बार मूसकुरा दो (1972)
दो चोर (1972)
पनीथीरथा वीदु (1973)
घर द्वार (1985)
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